हर गुजरते दिन के साथ सामान्य हो रहे जम्मू-कश्मीर के हालात

जम्मू कश्मीर में हर गुजरते दिन के साथ हालात सामान्य होते जा रहे हैं।  सड़कों पर गाडियों की मौजूदगी बढ़ गई है तो स्कूल कालेज भी सामान्य रूप से खुल रहे हैं। निजी वाहनों का आवागमन बढ़ने के चलते शहर के कई हिस्सों में जाम की स्थिति रही। शहर में निजी वाहनों, ऑटो रिक्शा और एक जिले से दूसरे जिले तक जाने वाली कैब के आवागमन में वृद्धि के चलते अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी।

घाटी के सभी सरकारी और निजी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी खुले । घाटी में कहीं प्रतिबंध नहीं है, लेकिन आतंक प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी है।  इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने एक बार फिर से कहा है कि धारा 370 हटाने का फैसला जम्मू कश्मीर के विकास में बहुत मददगार साबित होगा।

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाने के  बाद हालात और सामान्य हो गए हैं । कश्मीर घाटी में गुरुवार को स्थिति और अधिक सामान्य होने के संकेत दिखे। श्रीनगर की सड़कों पर सुबह भीषण जाम की स्थिति रही और दुकानें भी खुलीं। निजी वाहनों का आवागमन बढ़ने के चलते शहर के कई हिस्सों में जाम की स्थिति रही।

शहर में निजी वाहनों, ऑटो रिक्शा और एक जिले से दूसरे जिले तक जाने वाली कैब के आवागमन में वृद्धि के चलते अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। शहर के मुख्य बाजार और व्यावसायिक परिसरों में भी चहल पहल खुब दिखी। घाटी के सभी सरकारी और निजी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी खुले ।

घाटी में कहीं प्रतिबंध नहीं है, लेकिन आतंक प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी है। इस बीच  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर के विकास में एक अवरोधक था और 10 वर्षों के भीतर, यह राज्य देश के सबसे विकसित क्षेत्रों में से एक होगा। पीएमओ में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों का निरस्तीकरण ”तीन दशकों के संघर्ष” के बाद क्षेत्र के लोगों के लिए एक उपहार है।

उधर अमेरिका दौरे पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने को ”बहुप्रतीक्षित” और ”उचित” कदम बताते हुए कहा है कि पाकिस्तान से यही अपेक्षा थी कि वह इस निर्णय को चुनौती देने के लिए हर संभव कोशिश करेगा क्योंकि उसने कश्मीर में आतंकवाद भड़काने के लिए बड़ा निवेश किया हुआ है।  एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक ‘द हैरीटेज फाउंडेशन’ में उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने पांच अगस्त के फैसले के बाद से जम्मू-कश्मीर में अत्यंत संयम बरता है  ।

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