‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत डीएमआरसी द्वारा स्वदेशी सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी की शुरुआत

मंगलवार को शास्त्री पार्क में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में सचिव दुर्गा शंकर मिश्र द्वारा डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ मंगू सिंह, बीईएल की निदेशक शिखा गुप्ता की उपस्थिति में इस प्रोटोटाइप सिस्टम के साथ अन्य सब-सिस्टम के स्वदेशी सीबीटीसी प्रौद्योगिकी के भावी विकास के लिए आधुनिकतम प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया.

ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन (एटीएस) एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली है, जो ट्रेन ऑपरेशंस को मैनेज करती है. यह सिस्टम मेट्रो जैसे छोटे अंतराल वाले परिचालनों के लिए अति आवश्यक है, जहां हर एक मिनट के बाद सेवाएं दी जाती हैं. I-ATS स्वदेशी विकसित प्रौद्योगिकी है, जिससे इंडियन मेट्रो की उन विदेशी वेंडरों पर निर्भरता काफी कम होगी जो ऐसी प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहे हैं.

सीबीटीसी जैसी प्रौद्योगिकी प्रणालियां मुख्य रूप से यूरोपीय देशों और जापान द्वारा नियंत्रित की जाती हैं. भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” पहल के हिस्से के रूप में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने सीबीटीसी प्रौद्योगिकी को स्वदेशी बनाने का निर्णय लिया है.

डीएमआऱसी के साथ-साथ नीति आयोग, आवासन औऱ शहरी कार्य मंत्रालय, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड औऱ सी-डेक इस विकास कार्य के सहयोगी हैं. डीएमआरसी को इस महत्वपूर्ण “मेक इन इंडिया” पहल का नेतृत्व करने के लिए नामित किया गया है.

इस परियोजना को आगे ले जाने के लिए, डीएमआरसी और बीईएल ने इस स्वदेशी ATS प्रणाली के विकास के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. डीएमआरसी और बीईएल, गाज़ियाबाद की एक समर्पित टीम ने संयुक्त रूप से इस “आत्मनिर्भर भारत” मिशन को साकार करने के लिए अथक प्रयास किया है.

डीएमआरसी ने लाइन-1 (रेड लाइन) यानि रिठाला से शहीद स्थल, गाज़ियाबाद के ATS को अपग्रेड करते हुए स्वदेशी ATS (I-ATS) के उपयोग का निर्णय लिया है. फेज-4 में भी इसका उपयोग किया जाएगा. इस प्रौद्योगिकी की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं इस प्रकार हैं:

यह विभिन्न सप्लायरों के ट्रेन कंट्रोल एवं सिग्नलिंग सिस्टम पर काम कर सकती है.

I-ATS ट्रेन कंट्रोल एवं सिगनलिंग सिस्टम की प्रौद्योगिकी के विभिन्न स्तरों पर काम कर सकती है.

यह भारतीय रेलवे जो कि ATS गतिविधियों का उपयोग करती है, में इस्तेमाल लिए भी उपयुक्त है, जो इस समय केंद्रीकृत ट्रेन कंट्रोल का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही है.

फेज-4 कॉरिडोरों में I-ATS प्रणाली के उपयोग से प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस मॉड्यूल की शुरुआत भी की जाएगी.

इस अवसर पर ट्रेन ऑपरेटरों को ड्राइविंग और ट्रबल शूटिंग कौशलों के प्रशिक्षण के लिए “रोलिंग स्टॉक ड्राइवर प्रशिक्षण प्रणाली” के स्वदेशी विकास के लिए बीईएल के साथ एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. हम इसके आयात पर पूरी तरह निर्भर हैं. इसे एक कंप्यूटर आधारित ‘बैक-एंड’ प्रणाली के साथ ट्रेन ड्राइविंग कैब में स्थापित किया जाएगा, जहां ट्रेन ऑपरेटरों को ड्राइविंग और ट्रबलशूटिंग कौशलों का प्रशिक्षण देकर विभिन्न रियल लाइफ परिदृश्य उत्पन्न किया जाएगा.

प्रशिक्षण प्रणालियां, जिन्हें प्रचलित रूप से ड्राइविंग सिमुलेटर कहा जाता है, को अभी तक विशेष रूप से रोलिंग स्टॉक के लिए खरीदा जाता है. डेटाबेस में उपलब्ध विकल्पों में से चयन करके मल्टीपल स्टॉक के लिए स्वदेशी प्रणाली का उपयोग किया जा सकता है.

गिरीश निशाना, संवाददाता

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