प्रधानमंत्री ने की ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पूरे देश ने साबरमती के संत को सच्ची श्रद्धांजलि दी। साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित ‘स्वच्छ भारत दिवस कार्यक्रम’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। साबरमती आश्रम जाकर उन्होने बापू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रधानमंत्री ने एकल इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक को 2022 तक देश को मुक्त करने के संकल्प का भी आगाज किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता के प्रति देश की सफ़लता देश के सामूहिक समर्पण का आइना है। प्रधानमंत्री ने स्वच्छाग्रहियों को पुरस्कृत भी किया। इसमें पत्र लेखन, स्वच्छाग्रही, स्वच्छता और निबंध लेखन में शामिल रहे।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता गान को रिलीज किया। उन्होने वहां मौजूद 20 हज़ार से अधिक ग्राम प्रधान जो गुजरात और देश के कोने-कोने से पहुंचे थे उनका अभिनंदन किया। ये उन लोगों में से थे जिन्होने अपनी ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई है। घर-घर शौचालय बन जाने की वजह से एक ओर जहां महिलाओं के सशक्तिकरण को बल मिला है वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत और सामुदायिक  स्वच्छता बढ़ने की बदौलत कई संक्रामक बीमारियों से बचाव भी हुआ है और अनुमान के मुताबिक 3 लाख ज़िन्दगी को स्वच्छता के कदम से बचाया जा सका है। पिछले पांच साल की कड़ी मेहनत और हज़ारों लाखों स्वच्छाग्रहियों के अद्भुत समर्पण की बदौलत भारत ने भी एक सामाजिक क्रान्ति के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है।

साबरमती रिवर फ्रंट में आयोजित प्रदर्शिनी के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत में स्वच्छता की इस सफल यात्रा को देखा। उन्होने एक ऐसे स्वच्छाग्रही से भी मुलाक़ात की जो एक शिक्षक थे और उन्होने अपने पेंशन का 30 फीसदी हिस्सा शौचालय निर्माण के लिए समाज को दान कर दिया। चंद्रकांत कुलकर्णी को प्रधानमंत्री ने इस मानवसेवा के लिए काफी सराहा। प्रधानमंत्री ने सिक्के की सहायता से स्वच्छ भारत मिशन की जानकारी देने वाले सिस्सटम को भी देखा। इस ऐतिहासिक मौक़े पर स्मारक डाक टिकट जारी किया। जिसमें महात्मा गांधी के कई जीवन पहलूयों को समेटा गया है। साथ ही उन्होने गांधी जी की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक मौक़े पर 150रु. का सिक्का भी जारी किया।

15 अगस्त 2014 को लाल क़िले की ऐतिहासिक प्राचीर से स्वच्छता अभियान का संकल्प प्रधानमंत्री ने ख़ुद देश के सामने रखा और 2 अक्टू.2014 से शुरू हुआ सफ़र जनांदोलन बन 2 अक्टू.2019 तक देश खुले में शौच से मुक्त हो गया। 5 साल में देश भर में लगभग 11 करोड़ से ज़्यादा शौचालय बनवाए जा चुके हैं। 6 लाख गांवों और 699 ज़िलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। भारत की इस सफलता को दुनिया ने ना सिर्फ सराहा है बल्कि इसे अपनाना भी चाहते हैं।

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