पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी गतिरोध पर भारत का रुख सख़्त

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ विवाद पर भारत ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह स्पष्ट है कि बीते चार महीने में हमने जो हालात देखे हैं, वे प्रत्यक्ष रूप से चीनी पक्ष की गतिविधियों का नतीजा हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन की गतिविधियों का मकसद यथास्थिति में एकतरफा बदलाव करना है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले को हल करने की कोशिशें जारी हैं. ग्राउंड कमांडर हालात को देख रहे हैं, तो राजनयिक और सैन्य स्तर पर भी संपर्क जारी है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हालात को जिम्मेदाराना तरीके से संभाला जाना चाहिए. शांति और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताते हुए भारत ने कहा है कि पहले से तय प्रोटोकाल के तहत इसे हल किया जाना चाहिए.

भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे गुरुवार सुबह अपनी दो दिन की यात्रा पर लद्दाख पहुंचे. लद्दाख की अपनी इस यात्रा के दौरान सेना प्रमुख सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात कर पूर्वी लद्धाख में ताज़ा हालत की जानकारी ली. इसके साथ ही सेना प्रमुख सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा भी कर रहे हैं. इस बीच सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने एक कार्यक्रम में कहा कि तीनों सेनाएं किसी भी हालात से निपटने को तैयार हैं.

इन सबके बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शंघाई सहयोग संगठन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन के रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक और द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति में स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल सदस्य राष्ट्रों की संयुक्त बैठक भाग लेने के लिए रूस की राजधानी मास्को पहुंच गए हैं. 5 सितंबर तक की इस यात्रा के दौरान रक्षामंत्री अपने रूसी समकक्ष जनरल सर्गेई शोइगू से द्विपक्षीय सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे. बातचीत में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

पूर्वी लद्दाख की स्थिति को देखते हुए भी राजनाथ सिंह की इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है.

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