पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन से एकीकृत, व्‍यापक व समग्र तरीके से लड़ने की आवश्‍यकता पर दिया ज़ोर

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत, व्‍यापक और समग्र दृष्टिकोण के साथ निपटना होगा. उन्‍होंने कहा कि वैश्विक महामारी के प्रभाव से नागरिकों और अर्थव्‍यवस्‍थाओं को बचाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष पर भी ध्‍यान केंद्रित करना होगा. पीएम मोदी ने जी-टवेंटी सम्‍मेलन को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने कम कार्बन उत्‍सर्जन करने वाली और जलवायु के अनुकूल विकास प्रक्रियाएं अपनाई हैं.

उन्‍होंने कहा कि भारत न केवल पेरिस समझौते के लक्ष्‍यों को हासिल कर रहा है बल्कि उसके आगे भी जा रहा है. सरकार के प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एलईडी लाईट लोकप्रिय बनाई गई हैं, जिससे प्रति वर्ष तीन करोड 80 लाख टन कार्बन डाईऑक्‍साइड उत्‍सर्जन में कमी आई है. उन्‍होंने कहा कि उज्‍ज्‍वला योजना के तहत तकरीबन आठ करोड परिवारों को धुआंरहित रसोई उपलब्‍ध कराई गई है. यह दुनिया में सबसे बडा स्‍वच्‍छ ऊर्जा अभियान है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में एक बार इस्‍तेमाल होने वाली प्‍लास्टिक के उन्‍मूलन के प्रयास किए जा रहे हैं. देश का वन क्षेत्र बढ़ रहा है. शेर और बाघों की आबादी बढ रही है. सरकार ने 2030 तक दो करोड 60 लाख हेक्‍टेयर खराब भूमि को सामान्‍य भूमि बनाने का लक्ष्‍य रखा है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत मेट्रो नेटवर्क, जलमार्ग और इनकी तरह के अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे तैयार कर रहा है. उन्‍होंने भरोसा जताया कि भारत 2022 से पहले 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादित करने का लक्ष्‍य हासिल कर लेगा और 2030 तक 450 गीगावॉट का लक्ष्‍य प्राप्‍त हो जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि नई और सतत प्रौद्योगिकी में नवाचार और शोध बढाने का यही श्रेष्‍ठ समय है. उन्‍होंने कहा कि सभी को सहयोग और गठबंधन की भावना से यह करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि विकासशील विश्‍व को वित्‍त और प्रौद्योगिकी का सहयोग उपलब्‍ध कराया जाए तो पूरा विश्‍व तेजी से प्रगति कर सकता है.

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