जम्मू-कश्मीर के लिए 1,350 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का एलान

जम्मू-कश्मीर में तेज़ी लौटते अमन-चैन, कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच राज्य की अर्थ व्यवस्था को गति देने और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य के लिए 1,350 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का एलान किया है. यह पैकेज आत्मनिर्भर भारत पैकेज से अलग है. इस वित्त वर्त में अगले 6 महीने तक ऋण पर ब्याज में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी.

इससे आर्थिक समस्या झेल रहे बिजनेस समुदाय को राहत तो मिलेगी ही साथ ही राज्य में रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे. सरकार ने कारोबिरयों के साथ साथ आमजन को भी राहत देते हुए. एक साल तक बिजली और पानी के बिल में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा की है. इसके साथ ही स्टैम्प ड्यूटी में 31 मार्च 2021 तक के लिए छूट दी गई है. मनोज सिन्हा ने बताया हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग से जुड़े व्यवसायियों के लिए क्रैडिट लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है. इसके साथ ही ब्याज पर 7 फीसदी की छूट भी दी जाएगी.

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल का कार्यभार संभालने के बाद मनोज सिन्हा ने व्यापार जगत की स्थिति को जानने के लिए एक समिति का गठन किया था. कमेटी ने एक ऐसे पैकेज की रूपरेखा तैयार की है, जो न सिर्फ व्यापार को तीब्र गति बल्कि गरीबों, मध्यम वर्गों और छोटे उद्योगों को मज़बूती प्रदान करेगा. इतना ही नहीं 1 अक्टूबर से उद्यमियों सहित युवाओं के लिए जम्मू-कश्मीर बैंक की प्रत्येक शाखा में एक विशेष डेस्क स्थापित किया जाएगा. सरकार टैक्सी ड्राइवरों, ट्रांसपोर्टर, ऑटोरिक्शा ड्राइवरों, हाउसबोट के मालिकों, शिकारावालों और अन्य प्रभावित लोगों के वास्ते सुव्यवस्थित तंत्र और पैकेज के लिए काम कर रही है. पैकेज की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर की जनता में खुशी की लहर देखी जा रही है.

उपराज्यपाल का पदभार संभाले के बाद से मनोज सिन्हा एक्शन में हैं. उपराज्यपाल एक बाद एक विकास परियोजनाओं की समीक्षा कर कई नई योजनाओं को तेज़ गति के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. 18 सितंबर को श्रीनगर में खेल परिषद के कामकाज की समीक्षा की. जम्मू और कश्मीर दोनों संभाग में पांच-पांच अकादमियां स्थापित करने की घोषणा की गई. इससे पहले प्रशासनिक परिषद की बैठक में मुगल रोड के अपग्रेडेशन, सुधार और पुनरुत्थान को मंजूरी दी गई थी. इसके अलावा उपराज्यपाल स्कूल शिक्षा विभाग को 20 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाएं भी समर्पित कर चुके हैं. यह केंद्र शासित प्रदेश में शिक्षा को विकसित करने में सहायक होंगी. इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन, रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) का भी शुरूआत भी हो चुकी है. एससीईआरटी पूरी तरह से एनसीईआरटी की तर्ज पर कार्य करेगा. दरअसल, लोगों की शांति और समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए केंद्र शासित प्रदेश नए मिशन और प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है.

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