अर्थव्यवस्था की वृद्धि को बढ़ावा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: आरबीआई गवर्नर

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हाल के दिनों में आरबीआई की ओर से ब्याज दरों में की गई कटौती का सही फायदा ग्राहकों को नहीं मिल रहा है. आरबीआई की कोशिश है कि उसकी ओर से की गयी कटौती का सही फायदा ग्राहकों तक पहुंचे. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पूरी बैंकिंग व्यवस्था में कर्ज एवं जमा पर दी जाने वाली ब्याज दरों को केंद्रीय बैंक की रेपो दर में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि इससे मौद्रिक नीति का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में तेजी आएगी.

गौरतलब है कि भारतीय स्टेट बैंक समेत कई सार्वजनिक बैंकों ने हाल ही में अपनी कर्ज और जमा दर के मूल्यांकन को रेपो दर से जोड़ा है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसी महीने मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की कटौती करने के बाद बैंकों ने यह कदम उठाया.  बैंकों ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब आरबीआई ने उनकी खराब वित्तीय सेहत को देखते हुए इसके लिए दबाव नहीं डालने का फैसला किया है. उद्योग मंडल फिक्की की ओर से आयोजित सालाना बैंकिंग सम्मेलन में शक्तिकांत दास ने देश के आर्थिक हालात के बारे में भी राय रखी. उन्होंने कहा कि वृद्धि को बढ़ावा देना हम सभी की सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर नीति निर्माता के लिए यह चिंता का विषय है.

उन्होंने माना कि एनबीएफसी संकट, कुछ अहम क्षेत्रों में पूंजी उपलब्धता और मौद्रिक नीति का फायदा ग्राहकों को पहुंचाने और बैंकिंग सुधार से कारोबारी समुदाय के साथ अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता रहा है. आरबीआई गवर्नर ने उम्मीद से कम वृद्धि और आर्थिक सुस्ती के संकेतों को वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया है. दास ने एनपीए की समस्या से जूझ रहे सार्वजनिक बैंकों में कामकाज संचालन में सुधारों का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि बैंकों की असली परीक्षा बाजार से पूंजी प्राप्त करने की उसकी क्षमता है. बैंक को पूंजी के लिए सिर्फ सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

आरबीआई गवर्नर ने दिवाला कानून में किए गए संशोधनों का स्वागत किया.

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